शनि 1 अगस्त, 2026

छत्तीसगढ़ के पहली तिहार ‘‘हरेली’’

0
TejBahdur singh Bhuwal

छत्तीसगढ़ मा किसान मन के पहली तिहार के शुरूआत हरेली तिहार ले होथे। ये तिहार ला किसान मन खेती के बोआई, बियासी के बाद मनाथे। जेमा नागर, गैंती, कुदाली, फावड़ा ला चक उज्जर करके औउ गौधन के पूजा-पाठ करथे संग मा कुलदेवी-देवता, इन्द्र देवता, ठाकुर देव ला घलो सुमरथे। ये दिन किसान मन पर्यावरण बनाये राखे बर और सुख-शांति बनाये रखे के प्रार्थना करथे। बैगा मन रात में गांव के सुरक्षा करे बर पूजा-पाठ करथे। धान के कटोरा छत्तीसगढ़ महतारी ला किसान मन खेती-किसानी के उन्नति और विकास बर सुमरथे।

ये बखत हरेली तिहार में खुशहाली बढ़हिस हे जब छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल हा गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ राज्य के सपना ला सच करे बर छत्तीसगढ़ के पहली तिहार ‘‘हरेली’’ मा सामान्य छुट्टी देके प्रदेश के सबो लोगन ला भेंट दीस हे। मुख्यमंत्री हा सरकार बने के तुरंत बाद किसान मन के किसानी करजा ला माफ करिस हे। धान खरीदी ला 2500 रूपया प्रति क्विंटल करीस, कृषि भूमि के अधिग्रहण में 4 गुना मुआवजा के नियम बनाईस। एखरे साथ नरवा-गरवा-घुरवा औउ बारी के योजना चालू करके किसान मन बर उखर नदाये लोक संस्कृति औउ पारंपरिक चिन्हारी ला वापस लाईस हे। किसान मन ला ऐखर ले आर्थिक मजबूती मिलही। ये दरी हरेली तिहार छत्तीसगढ़ी संस्कृति के नवा कलेवर में नजर आही। प्रदेश में हरेली तिहार में सबे जिला मा विशेष आयोजन कर पकवान बनाये औउ आनी-बानी के खेल कराये जाही। नदाये तिहार ला अब सबो लोग-लईका मन जानए औउ मनाये येखर बर तिहार मन छुट्टी ला लागू करे गेहे।

ये दिन गांव-देहात में घरो-घर गुड़-चीला, फरा के संग गुलगुला भजिया, ठेठरी-खुरमी, करी लाडू, पपची, चैसेला, औउ भोभरा घलो बनाए जाथे, जेखर ले हरेली तिहार के उमंग ला दुगुना कर देथे। ये साल हरेली अमावस्या गुरूवार के पड़त हे, किसान मन अपन किसानी औजार के पूजा-पाठ कर गाय-बैला ला औषधि खवाये जाथे, ताकि वो हा सालभर स्वस्थ्य रहाय। गांव-देहात के संगे-संग शहर मन डाहर घलो हरेली तिहार मनाये जाथे। ऐसे माने जाथे कि हरेली तिहार बर खेती-किसानी के पहली काम हा पूरा हो जथे। यानी बोआई, बियासी के बाद किसान औउ गरवा मन आराम करथे। ये दिन गाय-गरवा मन ला बीमारी ले बचाय बर बगरंडा और नमक खवाय जाथे औउ आटा मा दसमूल-बागगोंदली ला मिलाके घलो खवाथे।

हरेली के दिन लोहार औउ राऊत मन घरो-घर मुहाटी मा नीम के डारा औउ चैखट में खीला ठोंके जाथे। मान्यता हे कि ऐसे करे ले ओ घर में रहैय्या मन के अनिष्ट ले रक्षा होथे। हरेली अमावस्या ला गेड़ी तिहार के नाम से घलो जानथे। ये दिन लईका मन बांस में खपच्ची लगाकर गेड़ी खपाथे। गेड़ी मा चढ़कर लईका मन रंग-रंग के करतब घलो दिखाते औउ लईका मन अपन साहस और संतुलन के प्रदर्शन घलो करथे। गांव मा लईका मन बर गेड़ी दौड़, खो-खो, कबड्डी, फुगड़ी, नरियल फेक खेल के आयोजन घलो करे जाथे।

खेती किसानी के पहली काम-बुआई औउ बियासी के बाद किसान भाई मन पानी औउ चीखला में खेत जाए बर गेड़ी बनाथे। ऐसे माने जाथे कि ऐखर ले सांप, बिच्छी, कीड़ा-मकोड़ा ले डर नहीं रहाय। छत्तीसगढ़ के पहली हरेली तिहार ले तिहार मन चालू हो जथे। एक के बाद एक तिहार आथे, जेमा हरेली तीज, नागपंचमी, राखी, कृष्ण जन्माष्टमी, तीजा, गणेश चैथ, श्राद्ध पक्ष प्रारंभ, नवरात्री, दशहरा, करवा चैथ, धनतेरस, दिवाली आथे। सबो तिहार ला छत्तीसगढ़ मा बड़े धूमधाम और जुरमिल के मनाये जाथे। ये दिन सबोझन ला खेती-किसानी औउ हरयाली ला बचाये बर कीरिया खाना चाही, तभे तो उपज बढ़ही औउ सबे सुखी रिही। जय छत्तीसगढ़ महतारी।

लेख – तेजबहादुर सिंह भुवाल

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

हो सकता है आप चूक गए हों