‘वंदे मातरम्’ गाते समय इन बातों का रखें अब ध्यान, नया कानून क्या बदलेगा, कितनी होगी सजा?
नई दिल्ली। देश के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को अब कानूनी सुरक्षा देने की दिशा में बड़ा कदम उठ गया है। संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा से ‘राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026’ पास हो चुका है। इसका सीधा मकसद राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को भी वही कानूनी सुरक्षा देना है, जो अब तक राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को मिलती रही है।
राज्यसभा में चर्चा के दौरान गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा, “यह कानून सिर्फ कानून में बदलाव के लिए नहीं है। यह भारत की आत्मा, राष्ट्रीय चेतना, हमारी सांस्कृतिक विरासत और आजादी के आंदोलन के मूल्यों के प्रति देश का संकल्प है।”
लोकसभा में जब यह बिल पेश हुआ, तो विपक्ष ने NEET पेपर लीक मामले के बाद छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर बहस की मांग को लेकर भारी हंगामा और नारेबाजी की। इसके बावजूद, हंगामे के बीच ही निचले सदन ने इसे ध्वनि मत से पारित कर दिया।
क्या है Vande Mataram Bill 2026? यह बिल Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 में बदलाव का प्रस्ताव रखता है। अभी इस कानून के तहत संविधान, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रीय गान जन गण मन को कानूनी सुरक्षा मिली हुई है। अब सरकार इसी दायरे में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को भी शामिल करना चाहती है।
राज्यसभा में बहस के दौरान केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि यह सिर्फ कानूनी बदलाव नहीं है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्रीय चेतना और आजादी के आंदोलन की भावना को सम्मान देने का कदम है। उन्होंने कहा, “यह संशोधन केवल कानून में बदलाव नहीं है। यह भारत की आत्मा, आजादी की लड़ाई की विरासत और राष्ट्रीय सम्मान के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।”
क्या कहता है पुराना कानून ?
1971 के बने ‘राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम’ के तहत अब तक संविधान, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान को कानूनी सुरक्षा मिलती थी। इसकी धारा 3 के मुताबिक, राष्ट्रगान गाने से रोकना या इसे गा रही भीड़ में खलल डालना अपराध माना जाता है। ऐसा करने पर दोषी को तीन साल तक की कैद, जुर्माना या फिर दोनों की सजा दी जा सकती है।
राष्ट्रगीत के सम्मान पर जोर
‘वन्दे मातरम’ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा एक ऐतिहासिक गीत है, जिसने आजादी के संघर्ष के दौरान लोगों में एकता और देशभक्ति की भावना को मजबूत किया था। विधेयक के जरिए इसी सम्मान और भावना को संरक्षित करने पर जोर दिया गया है।
सरकार का संदेश
सरकार ने कहा कि देश के राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान लोकतांत्रिक मूल्यों का हिस्सा है। किसी भी तरह से जानबूझकर अपमान या अवमानना करने वाली गतिविधियों पर रोक लगाना इस कानून का मुख्य उद्देश्य है।
