मंगल 28 जुलाई, 2026

जानलेवा “सॉफ्ट टिश्यू” बीमारी से जूझ रहे थे अरुण जेटली, लगातार गिर रहा था सेहत

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arun jetali

नई दिल्ली। आज पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का निधन हो गया, उनका नई दिल्ली में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(AMIS) में इलाज चल रहा था। सांस लेने में तकलीफ की शिकायत के बाद अरुण जेटली को भर्ती किया गया था। गहन चिकित्सा कक्ष (ICU) में दिल और गुर्दे के डॉक्टरों की एक टीम जेटली के स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने एम्स पहुंचकर उनका हाल जाना।

ज्ञात हो कि इसी साल मई में भी जेटली इलाज के लिए AMIS में भर्ती हुए थे। अरुण जेटली पहले भी कई बार AMIS में भर्ती हो चुके हैं। 14 मई 2018 को AMIS में उनका किडनी प्रत्यारोपण हुआ था। इसके लिए डॉक्टरों की टीम बाहरी अस्पतालों से आई थी।

पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली किडनी के साथ-साथ कैंसर से भी जूझ रहे हैं। उनके बायें पैर में सॉफ्ट टिशू कैंसर हो गया है जिसकी सर्जरी के लिए जेटली अमेरिका भी गए थे।

जनवरी 2019 पूर्व वित्त मंत्री को सारकोमा (फेफड़ा) में सॉफ्ट टिश्यू मिले थे। इसे लेकर उन्हें न्यूयार्क के डॉक्टरों की सलाह लेनी पड़ी थी। इसके बाद से उनका स्वास्थ्य लगातार गिरता जा रहा है। डॉक्टरों के कहने पर वे कई महीने से आइसोलेशन में रहे। जिसके कारण वह रिश्तेदारों, परिजनों और करीबियों को छोड़ बाकी लोगों से दूरी भी बनाई गई थी, वर्ष 2014 में अरुण जेटली की गैस्ट्रिक सर्जरी भी हो चुकी है। उन्हें मधुमेह की भी लंबे समय से परेशानी है।

वैसे तो हमारे शरीर में कई तरह के सॉफ्ट टिशू ट्यूमर होते हैं लेकिन सभी कैंसरस नहीं होते। सॉफ्ट टिशू में कई मामूली ट्यूमर भी होते हैं जिसका मतलब है कि इनमें कैंसर नहीं होता और वे शरीर के दूसरे हिस्सों में फैल नहीं सकते। लेकिन जब इस तरह की बीमारी के साथ सार्कोमा शब्द जुड़ जाता है तो इसका मतलब है कि उस ट्यूमर में कैंसर विकसित हो गया है और वह घातक है।

सार्कोमा एक तरह का कैंसर है जो हड्डी या मांसपेशियों के टिशू में शुरू होता है। बोन और सॉफ्ट टिशू सार्कोमा मुख्य तरह का सार्कोमा होता है। सॉफ्ट टिशू सार्कोमा, फैट, मसल्स, नर्व्स, फाइबर टिश्यू, रक्त धमनियां या फिर डीप स्किन टिशू में विकसित होता है। वैसे तो ये शरीर के किसी भी हिस्से में पाए जा सकते हैं लेकिन मुख्य तौर पर सॉफ्ट टिशू कैंसर की शुरुआत हाथ या पैर से होती है। 50 से भी ज्यादा अलग-अलग तरह का होता है सॉफ्ट टिशू सार्कोमा। इनमें से कुछ तो बेहद रेयर होते हैं।

पिछले काफी समय से अरुण जेटली अस्वस्थ चल रहे हैं और इसी वजह से उन्होंने 2019 का लोकसभा चुनाव भी नहीं लड़ा था। उन्होंने दूसरी मोदी सरकार की कैबिनेट में शामिल होने से भी इनकार कर दिया था। जेटली ने PM नरेंद्र मोदी को लिखी चिट्ठी ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा था, ‘पिछले 18 महीने से मैं बीमार हूं। मेरी तबीयत खराब है, इसलिए मुझे मंत्री बनाने पर विचार न करें।’

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