पेपर लीक संशोधन बिल को मोदी कैबिनेट की मंजूरी: 10 साल की जेल और ₹10 करोड़ का जुर्माना, तेजी से होगी सुनवाई
नई दिल्ली। देश में प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखने और पेपर लीक माफियाओं पर नकेल कसने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक’ (Public Examinations Amendment Bill) के मसौदे को मंजूरी दे दी गई है।
इस नए संशोधित बिल में पेपर लीक और धांधली में शामिल आरोपियों के खिलाफ कड़ी सजा और भारी जुर्माने का कड़ा प्रावधान किया गया है।
बिल के मुख्य प्रावधान और कड़े नियम
10 साल की कठोर जेल: नए संशोधन के तहत पेपर लीक और संगठित नकल कराने वाले गिरोहों को 5 से 10 वर्ष तक की जेल की सजा का प्रावधान किया गया है। पहले न्यूनतम सजा 3 साल थी, जिसे अब बढ़ाकर 5 साल कर दिया गया है।
₹10 करोड़ तक का जुर्माना: दोषियों पर न्यूनतम भारी जुर्माना लगाने के साथ-साथ अधिकतम जुर्माना 10 करोड़ रुपये तक तय करने का प्रस्ताव है।
फास्ट-ट्रैक कोर्ट (Fast-Track Courts): मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों के गठन का प्रस्ताव है, जिससे आरोपियों को 3 महीने के भीतर सजा सुनाई जा सके।
संपत्ति होगी जब्त: संगठित अपराध में लिप्त संस्थाओं या माफियाओं की अवैध संपत्ति कुर्क करने और परीक्षा में हुए कुल खर्च की भरपाई उनसे ही वसूलने का सख्त नियम शामिल है।
पीएम मोदी का संदेश: “छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं”
कैबिनेट से मंजूरी मिलने से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देर रात देश के अभ्यर्थियों के नाम एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने कहा:
“पेपर लीक कोई सामान्य घटना नहीं है, यह लाखों युवाओं और उनके माता-पिता के सपनों व वर्षों की मेहनत पर आघात है। सरकार परीक्षा प्रणाली में पूर्ण पारदर्शिता लाने के लिए प्रतिबद्ध है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।”
संसद में पेश करने की तैयारी
2024 के मूल ‘सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम’ को और अधिक सख्त बनाने के लिए लाए जा रहे इस संशोधन विधेयक को संसद के चालू सत्र में पेश किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इसका मुख्य उद्देश्य ईमानदार और मेधावी छात्रों के अधिकारों की रक्षा करना और अपराधियों के मन में कड़ा कानून का भय पैदा करना है।
