PM मोदी और मेलोनी की मुलाकात से मजबूत हुए भारत-इटली के रिश्ते, जानें किन-किन समझौतों पर बनी सहमति

रोम। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ हुई बातचीत को बेहद शानदार बताते हुए कहा कि दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करने के लिए भारत और इटली ने अपने संबंधों को “स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” के स्तर तक पहुंचा दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मेलोनी भारत-इटली दोस्ती को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि व्यापार, अंतरिक्ष, प्रौद्योगिकी समेत कई क्षेत्रों में दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

पीएम मोदी ने कहा, “प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ बातचीत बेहद उत्कृष्ट रही। भारत-इटली मित्रता को आगे बढ़ाने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता सराहनीय है। व्यापार, अंतरिक्ष, तकनीक और अन्य क्षेत्रों में हमारे संबंध काफी मजबूत हुए हैं। आपसी जुड़ाव को और गहरा करने के लिए हमने अपने रिश्तों को स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप तक बढ़ाया है।”

उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं ने भारत-इटली संयुक्त रणनीतिक कार्ययोजना 2025-2029 की प्रगति की समीक्षा भी की। साथ ही निवेश और आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति जताई गई।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता दोनों देशों के लिए एक ऐतिहासिक अवसर साबित हो सकता है। उन्होंने बताया कि बातचीत के दौरान डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी, विज्ञान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और अन्य आधुनिक क्षेत्रों पर भी चर्चा हुई।

इससे पहले रोम में संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने हिंदी शब्द ‘परिश्रम’ का उल्लेख करते हुए भारत की कार्य संस्कृति की सराहना की थी। उन्होंने कहा था कि “परिश्रम ही सफलता की कुंजी है” और भारत-इटली संबंध भी इसी मेहनत और समर्पण की भावना के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

इटली में भारत की राजदूत वाणी राव ने कहा कि यह यात्रा भारत और इटली के बढ़ते और गहरे होते संबंधों का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि दोनों देश रक्षा निर्माण, बंदरगाह, प्रतिभा आदान-प्रदान, ऊर्जा सुरक्षा और प्रौद्योगिकी सहयोग जैसे क्षेत्रों में दीर्घकालिक साझेदारी विकसित करेंगे। भारत चाहता है कि इतालवी कंपनियां देश को केवल बाजार नहीं, बल्कि रणनीतिक और तकनीकी साझेदार के रूप में देखें।

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