#AdityaL1Mission: #AdityaL1, हेलो ऑर्बिट में स्थापित, भारत की बड़ी कामयाबी, सूरज के L1 प्वाइंट पर पहुंचा Aditya यान, PM Modi ने वैज्ञानिकों को किया सलाम

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नई दिल्ली। देश की पहली सौर वेधशाला ‘आदित्य-एल1’ अपने गंतव्य तक पहुंच गई है। 110 दिनों की यात्रा, 15 लाख किलोमीटर की दूरी तय करने और बाद में एक सटीक कक्षा में प्रवेश के बाद, आदित्य-एल1 मिशन को अंतरिक्ष की विशालता में एक इष्टतम स्थान पर सफलतापूर्वक पार्क किया गया है, जहां से उसे सूर्य का अबाधित दृश्य दिखाई देगा। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने खबर साझा की और कहा कि भारत ने एक और उपलब्धि हासिल की है। भारत की पहली सौर वेधशाला, आदित्य-एल1 अपने गंतव्य तक पहुंच गई है। इसको लेकर उन्होंने एक एक्स पोस्ट लिखा।

https://twitter.com/ISRO_ADITYAL1/status/1743584807681192125

https://twitter.com/ISRO_ADITYAL1/status/1743599856806162917

अपने पोस्ट में लिखा कि भारत ने एक और उपलब्धि हासिल की। भारत की पहली सौर वेधशाला आदित्य-एल1 अपने गंतव्य तक पहुंची। यह सबसे जटिल और पेचीदा अंतरिक्ष अभियानों को साकार करने में हमारे वैज्ञानिकों के अथक समर्पण का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि मैं इस असाधारण उपलब्धि की सराहना करने में राष्ट्र के साथ शामिल हूं। हम मानवता के लाभ के लिए विज्ञान की नई सीमाओं को आगे बढ़ाना जारी रखेंगे। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने ट्वीट किया कि भारत के लिए यह साल कितना शानदार रहा। पीएम मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, टीम इसरो द्वारा लिखी गई एक और सफलता की कहानी। सूर्य-पृथ्वी कनेक्शन के रहस्यों की खोज के लिए आदित्य एल1 अपनी अंतिम कक्षा में पहुंच गया है।

प्रभामंडल कक्षा, एल 1 , एल 2 या एल 3 ‘लैग्रेंज प्वाइंट’ में से एक के पास एक आवधिक, त्रि-आयामी कक्षा है। इसरो के ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी-सी57) ने दो सितंबर को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी) के दूसरे प्रक्षेपण केंद्र से आदित्य-एल1 को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया था। पीएसएलवी ने 63 मिनट और 20 सेकंड की उड़ान के बाद उसने पृथ्वी की आसपास की अंडाकार कक्षा में आदित्य-एल1 को स्थापित किया था। ‘आदित्य एल1’ को सूर्य परिमंडल के दूरस्थ अवलोकन और पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर ‘एल1’ (सूर्य-पृथ्वी लैग्रेंजियन बिंदु) पर सौर वायु का वास्तविक अवलोकन करने के लिए डिजाइन किया गया है।

ये है मिशन का मकसद?
भारत के इस मिशन आदित्य एल1 का मकसद सूर्य का विस्तार से स्टडी करना है। मिशन में अलग-अलग वेव बैंड में फोटोस्फेयर (प्रकाशमंडल), क्रोमोस्फेयर (सूर्य की दिखाई देने वाली सतह से ठीक ऊपरी सतह) और सूर्य की बाहरी परत पर रिसर्च होगी। इससे भारतीय वैज्ञानिकों को सूर्य के रहस्यों को सुलझाने को में सफलता मिल सकती है। सोशल मीडिया पर इस मिशन को लेकर काफी चर्चा हो रही है।

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