फ्री- पॉलिटिक्स : दिल्ली में AAP का ”मुफ़्त वाला वादा”, ने भारतीय राजनीति में अन्य राज्यों के लिए खोले नई संभावनाओं के द्वार

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नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे हैरान करने वाले आए हैं। दिल्ली में झाड़ू का प्रभाव जमकर चला और ऐसा चला है कि सब कुछ साफ हो गया और लगभग सभी सीटों पर सिर्फ और सिर्फ APP ही दिखा। कांग्रेस का तो नामोनिशां इस बार भी नहीं दिख रहा, BJP ने भी अपनी उम्मीदों के मुताबिक बिल्कुल भी प्रदर्शन नहीं किया। अब सवाल ये उठ रहा है कि आखिर अरविंद केजरीवाल ने इस बार भी इतनी बड़ी जीत कैसे पा ली? आम आदमी पार्टी को जीत केवल अरविंद केजरीवाल के नाम पर ही मिली है इसमें कोई शक नहीं। आप का पूरा का पूरा अभियान दिल्ली सरकार द्वारा किए गए कामों पर ही ​फोकस रहा। इनमें मोहल्ला क्लिनिक, मुफ्त बिजली-पानी, महिलाओं को फ्री बस यात्रा, बुजुर्गों के लिए तीर्थ यात्रा और शिक्षा के क्षेत्र में किए गए महत्वपूर्ण बदलाव विशेष तौर पर शामिल है। दिल्ली के दंगल में इस बार जनता ने उसे चुना जो उन्हें महंगाई के इस दौर में मूलभूत जरूरत की चीजें मुफ्त देने और मुफ्त बनाए रखने का वादा किया। जिसके सहारे आप ने जीत की हैट्रिक लगाई। लेकिन दिल्ली की इस जीत के साथ ही सियासत में एक फ्री के प्रभाव वाली राजनीति के संभावनाओं के नए द्वार खोल दिए हैं।

दिल्ली विधानसभा के चुनाव में एक तरफ जहां बीजेपी ने राष्ट्रवाद और शाहीन बाग को प्रमुखता से उठाया तो वहीं केजरीवाल ने स्थानीय मुद्दों पर ही जोर लगाया। बिजली बिल पर राहत देने को भी अरविंद केजरीवाल ने सरकार के कामों में गिनाया। महिलाओं के लिए बसों में मुफ्त सफर, 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली और 20 हजार लीटर पानी के साथ साथ अब दिल्ली में मुफ्त वाई-फाई सेवा ने भी लोगों के मन में आप सरकार के प्रति विशेष भावना बनाई।

दिल्ली में APP के वादें

  • 20 हज़ार लीटर फ्री पानी (नल)
  • 200 यूनिट तक बिजली फ्री (बिजली )
  • महिलाओं को बस में यात्रा फ्री (महिला)
  • छात्रों को फ्री यात्रा की गारंटी (DTC बस)
  • ग्रेजुएशन तक शिक्षा फ्री (छात्र)
  • मुफ्त इलाज की गारंटी (अस्पताल)
  • हर इलाके में फ्री वाई-फाई (WiFi)

देश के अन्य राज्यों में वैसे तो फ्री- पॉलिटिक्स का चलन काफी पहले से है। चाहे वो बिहार में नीतीश कुमार द्वारा साइकिल दिया जाना हो या ओडिशा की पचटनायक सरकार द्वारा LED बल्ब और शिक्षा लोन दिया जाना हो। लेकिन बिजली और पानी ऐसा मुद्दा है जो सीधे-सीधे निम्न और मध्यम वर्ग के वोटरों को कनेक्ट करता है। दिल्ली में यह फॉर्मूला हिट रहा है। वोटरों ने झोली भर कर केजरीवाल की पार्टी को वोट दिया। अब जीत के इस फंडे को दूसरे मुख्यमंत्रियों द्वारा भी आजमाया जा सकता है। ममता सरकार ने तो मुफ्त बिजली देने का एलान भी कर दिया। जिसके अंतर्रगत 3 महीने में 75 यूनिट तक बिजली खपत करने वालों को ये सुविधा मिलेगी। इसका फायदा 35 लाख गरीब परिवारों को मिलेगा। ममता सरकार ने इसके लिए 200 करोड़ रुपये का बजट भी रखा है। बता दें कि अगले साल ही बंगाल में विधानसभा के चुनाव होने हैं। बंगाल की तरह महाराष्ट्र में भी फ्री बिजली देने पर काम शुरू हो गया है। उद्धव ठाकरे सरकार हर महीने 100 यूनिट बिजली फ्री देना चाहती है। इसके लिए बिजली विभाग के अफसरों को रिपोर्ट बनाने के लिए कहा गया है। तीन महीने की डेडलाइन दी गई है।

कुल मिलाकर, आप की जीत से अन्य राज्यों में भी मुफ्त के चुनावी वादें देखने को मिल सकते हैं और वैसे भी राजनीति में सफल और टेस्टेड फॉर्मूले ही प्रयोग में लाए जाते हैं।

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