घाटे में राज्य, फिर क्यों बांट रहे मुफ्त की रेवड़ियां?, मुफ्त की स्कीमों पर भड़का सुप्रीम कोर्ट; सरकारों को नसीहत

नई दिल्ली। आज सर्वोच्च न्यायालय ने सभी राज्यों के राजनीतिक दलों द्वारा “मुफ्त योजनाओं” के वितरण की कड़ी आलोचना की और सार्वजनिक वित्त पर इसके प्रभाव पर चिंता व्यक्त की। न्यायालय ने कहा कि राजनीतिक दलों को मुफ्त योजनाओं के माध्यम से संसाधन वितरित करने के बजाय, ऐसी सुनियोजित नीतियां बनानी चाहिए जो लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने वाली योजनाएं पेश करें, जैसे कि बेरोजगारी योजनाएं। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि इस तरह के फिजूलखर्ची से देश का आर्थिक विकास बाधित…