विशेष लेख : त्यौहारों का द्वार – हरेली त्यौहार

छत्तीसगढ़ में कहा जाता है त्योहारों का द्वार हरेली तिहार। हरेली तिहार छत्तीसगढ़ का सबसे पहला त्यौहार है, जो लोगों को छत्तीसगढ़ की संस्कृति और आस्था से परिचित कराता है। हरेली त्यौहार एक कृषि त्यौहार है। हरेली का मतलब हरियाली होता है, जो हर वर्ष सावन महीने के अमावस्या में मनाया जाता है। हरेली मुख्यतः खेती-किसानी से जुड़ा पर्व है। छत्तीसगढ़ राज्य में ग्रामीण किसानों द्वारा बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस त्यौहार के पहले तक किसान अपनी फसलों की बोआई या रोपाई कर लेते हैं और इस…

विशेष लेख :प्रकृति की धुली हुई हरियाली का स्वागत करना ही है – हरेली

श्रीमती दिव्या वैष्णवश्रावण माह की अमावस्या एक ऐसा दिन जो विशेष भी है और महत्वपूर्ण भी। इस दिन से छत्तीसगढ़ महतारी के आंगन में त्यौहारों का आगमन शुरू हो गया है। अगर आपका बचपन छत्तीसगढ़ की मिट्टी में गुजरा है तो आज के दिन का महत्व आपने जरूर देखा और समझा होगा लेकिन अगर आप आज के इस विशेष दिन के बारे में नहीं जानते हैं तो आज आपका परिचय छत्तीसगढ़ के पहले त्यौहार ‘हरेली तिहार’ से होगा।हरेली एक कृषि त्यौहार है और हरियाली शब्द से जुड़ा है।गौर कीजिए,आज आपने…

विशेष लेख : छत्तीसगढ़ मा हरेली तिहार के धूम

छत्तीसगढ़ के गांव-गवई के मनखे मन के जिन्दगी मा रचे-बसे हे खेती किसानी। अउ इही खेती किसानी से जुड़े हे हमर पहली तिहार हरेली। छत्तीसगढ़ मा लोक संस्स्कृति, परम्परा ले जुड़े अउ सहेजे बर ये तिहार ला सब्बो लोगन मन हंसी, खुसी, आस्था, प्रेम व्यवहार अउ धूमधाम से मनाथे। इही दिन ले तिहार के सुरूआत हो जथे। सावन के आये ले चारो मुड़ा हरियर-हरियर रूख, राही, पेड़, झाड़, खेत-खलियान हा मन ला मोह डारथे। ये तिहार ला किसान मन खेती के बोआई, बियासी के बाद मनाथे। जेमा जुड़ा, नागर, गैंती,…

गोबर संग्रहण और वर्मी कंपोस्ट खाद के काम से घर वालों को थी परेशानी, दो साल में 93 लाख रूपए के टर्नओवर से अब बदल गया है घरवालों का नजरियाः प्रीति टोप्पो

कोरिया जिले के मनेन्द्रगढ़ की रहने वाली प्रीति टोप्पो एक गरीब परिवार से संबंध रखती हैं। दो साल पहले छत्तीसगढ़ में आज ही के दिन गोधन न्याय योजना की शुरूआत हुई। प्रीति को लगा जैसे ये योजना उन्हीं के लिए बनायी गयी है। प्रीति ने अपने ही जैसे अन्य महिलाओं के साथ एक महिला स्व सहायता समूह बनाया और गोबर संग्रहण के साथ ही वर्मी कंपोस्ट खाद के निर्माण में जुट गईं। आज दो वर्षों बाद प्रीति टोप्पो समूह के माध्यम से 93 लाख रूपए का वर्मी कंपोस्ट खाद बेच…

विशेष लेख : कुलगांव में छत्तीसगढ़ का पहला रूरल इंडस्ट्रीयल पार्क, कुलगांव में दिखी बापू के सपनों की झलक

छत्तीसगढ़ में गौठनों को रूरल इंडस्ट्रियल पार्क के रूप में विकसित करने की परिकल्पना अब धीरे-धीरे आकार लेने लगी है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की ग्राम स्वराज्य की परिकल्पना के अनुरुप मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में गांवों में छोटे-छोटे कुटीर उद्योग स्थापित कर लोगों को रोजगार और आमदनी के साधन से जोड़ा जा रहा है। छत्तीसगढ़ के ऐसे पहले रूरल इंडस्ट्रियल पार्क ने कांकेर जिले के कुलगांव में आकार ले लिया है, जिसे गांधी ग्राम का नाम दिया गया है, वहां गौठान को रूरल इंडस्ट्रियल पार्क के रूप में विकसित…

विशेष लेख : छत्तीसगढ़ में एयर कनेक्टिविटी की उम्मीदों को मिली नई उड़ान

तरक्की और विकास का रिश्ता अच्छी कनेक्टिविटी से जुड़ा है। कनेक्टिविटी की सुविधा जितनी ज्यादा होगी वहां विकास उतना ही तेजी से होता है। यह सुविधा लोगों को एक दूसरे से जोड़ती है वही क्षेत्रीय असंतुलन को भी दूर करने में मदद करती है। अच्छी सड़क और हवाई कनेक्टिविटी जीवन स्तर को जांचने का भी पैमाना भी है। हाल के साढे तीन वर्षों में मुख्यमंत्री भूपेश बधेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में हवाई कनेक्टिीविटी की उम्मीदों को नई उड़ान है। छत्तीसगढ़ में हाल के साढ़े तीन साल की बात करें…

गर्मी के मौसम में गुणकारी है ‘बोरे बासी’

किसी भी राज्य की संस्कृति में वहां की भौगोलिक परिस्थितियां काफी असर डालती है। छत्तीसगढ़ में देश के अन्य हिस्सों की तुलना में ज्यादा बारिश होती है, इसलिए यहां धान की फसल ली जाती है। धान की विपुल फसल होने के कारण छत्तीसगढ़ देशभर में धान के कटोरे के रूप में प्रसिद्ध है। यहां के किसानों की आय के मुख्य जरिया भी धान की फसल है। यहां तीज त्यौहारों से लेकर दैनिक जीवन में चावल का बहुतायत से उपयोग होता है। छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति-खान-पान, बोली-भाषा और वेश-भूषा पर गर्व की…

छत्तीसगढ़ की जीवनशैली का अहम हिस्सा है ‘बासी’

छत्तीसगढ़ में एक प्रसिद्ध कहावत है – ‘बासी के नून नइ हटय’, इसका कहावत का हिन्दी भावार्थ है कि, बासी में मिला हुआ नमक नहीं निकल सकता। इस कहावत का उपयोग सम्मान के परिपेक्ष्य में किया जाता है। सवाल उठ सकता है कि आखिर यहां बात ‘बासी’ की क्यों हो रही है, तो बात जब किसी प्रदेश की होती है तो साथ में बात वहां के खान-पान की भी होती है। छत्तीसगढ़ में खान-पान के साथ जीवनशैली का एक अहम हिस्सा है ‘बासी’। शायद इसलिए भी छत्तीसगढ़ी फिल्मों में छत्तीसगढ़ी…

राज्य में तीन वर्षाें में कुपोषण में 8.7 प्रतिशत की कमी, महिलाओं और बच्चों की बेहतरी सरकार की प्राथमिकता

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा समाज के सभी वर्गाें की खुशहाली और बेहतरी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य में महिलाओं और बच्चों के हितों के संरक्षण और उनकी बेहतरी के लिए कई अभिनव योजनाएं संचालित की जा रही है। महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा और उनके स्वास्थ्य के स्तर को बेहतर बनाने के लिए मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान सहित अन्य कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं, जिससे राज्य में महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य की स्थिति में तेजी से सुधार हो…

शिवरीनारायण : जहां प्रभु राम ने खाए थे शबरी के जूठे बेर

रायपुर। छत्तीसगढ़ में महानदी, शिवनाथ और जोंक नदी के संगम पर बसा शिवरीनारायण धार्मिक, ऐतिहासिक और पौराणिक नगरी के रूप में प्रसिद्ध है। इस स्थान की महत्ता इस बात से पता चलती है कि देश के चार प्रमुख धाम बद्रीनाथ, द्वारका, जगन्नाथपुरी और रामेश्वरम के बाद इसे पांचवे धाम की संज्ञा दी गई है। यह स्थान भगवान जगन्नाथ का मूल स्थान है इसलिए छत्तीसगढ़ के जगन्नाथपुरी के रूप में प्रसिद्ध है। यहां प्रभु राम का नारायणी रूप गुप्त रूप से विराजमान है इसलिए यह गुप्त तीर्थधाम या गुप्त प्रयागराज के…