लव जिहाद : अंतरधार्मिक विवाह पर इलाहाबाद HC का अहम आदेश, शादी से पहले नोटिस लगाना जरूरी नहीं

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नई दिल्ली। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अंतरधार्मिक विवाहों को लेकर अहम आदेश देते हुए कहा है कि इस तरह की शादियों के नोटिस लगाना अब जरूरी नहीं होगा। अदालत ने कहा है कि नोटिस का लगाया जाना किसी की स्वतंत्रता और गोपनीयता के मौलिक अधिकार पर आक्रमण है। ये किसी जोड़े की राज्य के हस्तक्षेप के बिना शादी करने की स्वतंत्रता को भी प्रभावित करता है।

अंतरधार्मिक विवाह में जोड़े को डिस्ट्रिक्ट मैरिज ऑफिसर को शादी के लिए पहले से लिखित सूचना देनी होती है। शादी से 30 दिन पहले ये सूचना दी जाती है। जिसके बाद अधिकारी अपने कार्यालय में ये नोटिस लगाता है, जिस पर 30 दिनों के भीतर शादी को लेकर कोई आपत्ति करना चाहता है तो कर सकता है।

मंगलवार को 47 पेज के अपने फैसले में जस्टिस विवेक चौधरी ने कहा कि जोड़ा मैरिज ऑफिसर को लिखित में ये दे सकता है कि वो नोटिस प्रकाशित कराना चाहते हैं या नहीं। अगर वे नोटिस के प्रकाशन के लिए अनुरोध नहीं करते हैं, तो विवाह अधिकारी इस तरह के नोटिस को प्रकाशित नहीं करेगा। हिन्दू धर्म अपनाकर मुस्लिम से शादी करने वाली एक महिला की याचिका पर अदालत ने ये फैसला दिया है।

बीते हफ्ते भी इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अंतरधार्मिक विवाह करने वाले युवक-युवती के संबंध में अहम फैसला देते हुए कहा था कि दो वयस्क अपनी इच्छा से साथ रह रहे हों, तो उनके जीवन में कोई अन्य व्यक्ति हस्तक्षेप नहीं कर सकता। इस अदालत ने कई बार यह व्यवस्था दी है कि जब दो बालिग व्यक्ति एक साथ रह रहे हों, तो किसी को भी उनके शांतिपूर्ण जीवन में दखल देने का अधिकार नहीं है।

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