भारत के भरोसेमंद मित्र Vladimir Putin दिल्ली पहुंचे, दोस्त की अगवानी करने खुद हवाई अड्डे पहुंचे मोदी, कैसे किया स्वागत और मेहमान नवाजी…तस्वीरों में यहां देखिए..

नई दिल्ली। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपनी दो दिवसीय भारत यात्रा के लिए दिल्ली पहुँच चुके हैं। PM मोदी ने एयरपोर्ट पर पहुंच कर रिसीव किया। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह उनकी पहली यात्रा है, जो वैश्विक मंच पर अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अपनी लगभग 30 घंटे की इस संक्षिप्त यात्रा के दौरान, पुतिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। पीएम मोदी ने आज रात 7, लोक कल्याण मार्ग पर पुतिन के लिए निजी रात्रिभोज का आयोजन किया है। इस उच्च-स्तरीय संवाद का एजेंडा रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और तकनीक जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करना है।

हम आपको बता दें कि पुतिन की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब वैश्विक व्यवस्था तेज़ी से बदल रही है, रूस–यूक्रेन संघर्ष अपने महत्वपूर्ण मोड़ पर है और भारत–अमेरिका संबंध नए तनावों से गुजर रहे हैं। ऐसे माहौल में पुतिन का दिल्ली पहुँचना न केवल कूटनीतिक दृष्टि से अहम है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच दशकों पुराने ‘विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’ के नए अध्याय की शुरुआत का संकेत भी देता है।

हम आपको यह भी बता दें कि रूसी राष्ट्रपति के आगमन से पहले ही राष्ट्रीय राजधानी को अभूतपूर्व सुरक्षा घेरों में बदल दिया गया। दिल्ली पुलिस, केंद्रीय एजेंसियों और पुतिन की निजी सुरक्षा टीम ने मिलकर एक बहु-स्तरीय सुरक्षा कवच तैयार किया है। संवेदनशील मार्गों पर स्नाइपर्स, स्वैट टीमें, आतंकवाद रोधी इकाइयाँ और त्वरित प्रतिक्रिया दल तैनात किए गए हैं। 5,000 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है, जबकि ड्रोन-रोधी प्रणाली और उन्नत तकनीकी निगरानी तंत्र भी सक्रिय कर दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि “मिनट-टू-मिनट कोऑर्डिनेशन” के साथ पूरी यात्रा पर बारीकी से नज़र रखी जा रही है।

हम आपको यह भी बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति के लिए एक निजी रात्रिभोज का आयोजन किया है। यह वही परंपरा है जिसकी झलक पिछले वर्ष तब भी दिखी थी जब रूस यात्रा में पुतिन ने मोदी को निजी भोज पर आमंत्रित किया था। यह ‘डिनर डिप्लोमेसी’ केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि दोनों नेताओं के व्यक्तिगत समीकरण की गहराई को दर्शाती है। इस अनौपचारिक बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार विस्तार, रक्षा सहयोग और नए उभरते क्षेत्रों— जैसे स्पेस टेक्नोलॉजी, लॉजिस्टिक्स, न्यूक्लियर मॉड्यूलर रिएक्टर और कौशल एवं श्रमिक गतिशीलता आदि पर व्यापक विमर्श होने की संभावना है।

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