धर्म डेस्क (BNS)। लाल साड़ी, कमल के फूल और सोने के सिक्कों के साथ माँ लक्ष्मी का स्वरूप, और उनके महावर लगे चरणों से बनते सुनहरे कमल के निशान – यही दीपावली का असली संदेश है कि जहाँ स्वच्छता और दीपक होता है, वहाँ माँ का वास होता है।
दरवाजे पर गेंदे के फूलों की मालाएं सजी हैं, चारों ओर मिट्टी के दीये जगमगा रहे हैं और जमीन पर माँ लक्ष्मी के सुनहरे, प्रकाशमान चरण-चिन्ह घर के अंदर की ओर आते हुए दिख रहे हैं। मानो माँ लक्ष्मी स्वयं साक्षात पधार गई हों।
यही दीपावली का असली संदेश है कि जहाँ स्वच्छता और दीपक होता है, वहाँ माँ का वास होता है।इस दृश्य पर जो मधुर भजन बज रहा है, वह हर घर में गूंज रहा है:विष्णुप्रिया है वरावरस्वामिनी, माता सुरेश्वरी काज संवारो।
gn: justify;">तेरी कृपा बिन सूना है जीवन, सेवक के घर आज पधारो।माँ लक्ष्मी पूजन विधि (दीपावली 2026)प्रदोष काल में उत्तर दिशा में लाल कपड़ा बिछाकर चौकी लगाएं।भगवान गणेश और माँ लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। घी का दीया, कमलगट्टा, फूल, खील-बताशा और मिठाई अर्पित करें।
मंत्र: ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमःमाँ लक्ष्मी जी की आरतीॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निसदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥ उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता। सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता…आरती के बाद क्या बोलें?
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