नई दिल्ली। अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITMC) के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहे विवाद में चुनाव आयोग ने अंतरिम फैसला सुनाते हुए फिलहाल पार्टी के नाम और आरक्षित चुनाव चिन्ह ‘फूल और घास’ के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। आयोग के इस आदेश के बाद ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले दोनों गुट आगामी उपचुनाव में फिलहाल इस नाम और चिन्ह का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।
आयोग ने कहा है कि दोनों गुट अपने लिए अलग-अलग नाम चुन सकते हैं। वे चाहें तो अपने नए नाम में मूल पार्टी ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ से संबंध का उल्लेख भी कर सकते हैं। दोनों पक्षों को चुनाव आयोग की ओर से अधिसूचित फ्री सिंबल्स की सूची में से अलग-अलग चुनाव चिन्ह चुनने का विकल्प दिया गया है।
18 सितंबर सुबह 11 बजे तक देना होगा विकल्प
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चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को निर्देश दिया है कि वे 18 सितंबर को सुबह 11 बजे तक अपने पसंदीदा तीन नाम और तीन चुनाव चिन्हों के विकल्प आयोग को उपलब्ध कराएं। इसके बाद आयोग मौजूदा उपचुनावों के लिए दोनों पक्षों को अलग-अलग नाम और चिन्ह आवंटित करेगा।
6 अक्टूबर को होने हैं उपचुनाव
यह अंतरिम व्यवस्था पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनावों से पहले की गई है। इन सीटों पर मतदान 6 अक्टूबर को होना है।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
तृणमूल कांग्रेस के संगठनात्मक नियंत्रण और अधिकृत नेतृत्व को लेकर दोनों गुटों के बीच विवाद चल रहा है। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति और उसके कार्यकाल को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने इन दावों को खारिज करते हुए प्रतिद्वंद्वी गुट के संगठनात्मक दावों पर सवाल उठाए हैं।
आयोग ने 12 सितंबर को दोनों पक्षों की दलीलें सुनी थीं और अतिरिक्त दस्तावेज मांगे थे। इसके बाद 17 सितंबर को दोनों पक्षों की अलग-अलग सुनवाई हुई।
अंतिम फैसला अभी बाकी
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह अंतरिम व्यवस्था है। पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर अंतिम निर्णय बाद की प्रक्रिया में लिया जाएगा। आयोग ने इस मामले में Election Symbols (Reservation and Allotment) Order, 1968 के पैराग्राफ 15 के तहत अंतिम निर्धारण की आवश्यकता बताई है।
“बहरहाल, फिलहाल तस्वीर साफ है—आगामी उपचुनाव में दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में उतरना होगा। वहीं, तृणमूल कांग्रेस के मूल नाम और चुनाव चिन्ह पर अंतिम फैसला अभी बाकी है।”
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