रायपुर/नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 8 नवंबर को छत्तीसगढ़ के बस्तर में सुरक्षा बलों के जवानों के साथ दीपावली मनाई। इस दौरान उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में जवानों के साहस और बलिदान की सराहना की। साथ ही कांग्रेस और पहले की सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि जंगलों से हथियारी नक्सली खत्म हो चुके हैं, लेकिन दिमागी नक्सलियों से अभी मुकाबला बाकी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दीपावली खास है, क्योंकि देश का हर जिला अब नक्सलवाद से मुक्त है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय सुरक्षा बलों के जवानों को दिया। कहा कि जवानों के समर्पण और बलिदान के कारण ही नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति और विकास का रास्ता खुला है।
जवानों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हथियार उठाने वाले नक्सली जंगलों से खत्म हो गए हैं, लेकिन कुछ लोग अब भी अलग-अलग संगठनों और राजनीतिक दलों में मौजू
द हैं। वे संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ लोगों को भड़काने का काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को पहचानना, उन्हें परास्त करना और देश की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। प्रधानमंत्री ने इस तरह की विचारधारा को देश के लिए चुनौती बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समय देश के करीब 20 राज्यों के 230 से ज्यादा जिले नक्सलवाद की चपेट में थे। कई इलाकों में शाम होते ही लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो जाता था। नक्सली स्कूलों को निशाना बनाते थे और लोगों को मतदान करने से भी रोकते थे।
उन्होंने 2004 से 2013 के बीच की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में हर साल नक्सलियों के हाथों सुरक्षा बलों के जवान बड़ी संख्या में मारे जाते थे। पीएम ने आरोप लगाया कि पहले की सरकारों ने नक्सलवाद को गंभीरता से नहीं लिया और इसे खत्म करने के लिए जरूरी इच्छाशक्ति नहीं दिखाई।
पीएम मोदी ने 2010 में दंतेवाड़ा में हुए नक्सली हमलों को याद किया। उन्होंने कहा कि उस दौर में सुरक्षा बलों और आम नागरिकों ने भारी कीमत चुकाई। छत्तीसगढ़ की धरती जवानों के बलिदान की गवाह रही है।
उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में ड्यूटी के दौरान सीआरपीएफ का एक भी जवान शहीद नहीं हुआ। प्रधानमंत्री ने इसे सुरक्षा बलों के साहस और सरकार की नीतियों का परिणाम बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के कारण लंबे समय तक बस्तर का विकास रुका रहा। स्कूल, सड़क और दूसरी सुविधाओं का काम प्रभावित हुआ। अब सुरक्षा की स्थिति बेहतर होने के साथ क्षेत्र में विकास के नए रास्ते खुल रहे हैं।
उन्होंने जवानों से कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ मिली सफलता मंजिल नहीं, बल्कि आगे बढ़ने की शुरुआत है। बस्तर के लोगों तक शिक्षा, रोजगार और बेहतर सुविधाएं पहुंचाना अब बड़ी जिम्मेदारी है।
बहरहाल, बस्तर में जवानों के साथ दीपावली मनाकर प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में सुरक्षा बलों के योगदान को सम्मान दिया। वहीं, ‘दिमागी नक्सल’ पर उनके बयान ने राजनीतिक बहस को भी नया मुद्दा दे दिया है।
Leave a Reply