नई दिल्ली। होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते सुरक्षा खतरे को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर सख्त आदेश जारी किया है। ट्रंप ने अमेरिकी नौसेना को संदिग्ध गतिविधियों में शामिल किसी भी नाव को तत्काल नष्ट करने का आदेश दिया है। साथ ही उन्होंने माइन-स्वीपिंग अभियानों को और तेज करने को कहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया अकाउंट ‘ट्रुथ सोशल’ पोस्ट में कहा, “मैंने यूनाइटेड स्टेट्स नेवी को आदेश दिया है कि वह किसी भी नाव को, चाहे वह कितनी भी छोटी क्यों न हो, जो होर्मुज स्ट्रेट के पानी में बारूदी सुरंगें बिछा रही हो, उसे गोली मारकर नष्ट कर दे। इसमें जरा भी हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि हमारे बारूदी सुरंग हटाने वाले जहाज (माइन स्वीपर्स) इस समय जलडमरूमध्य को साफ कर रहे हैं। मैं आदेश देता हूं कि यह काम अब तीन गुना ज्यादा तेजी से जारी रहे। इस मामले पर ध्यान देने के लिए आपका धन्यवाद।”
इसके साथ ही उन्होंने ईरान की आंतरिक राजनीति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने ईरान में नेतृत्व को लेकर चल रही खींचतान का जिक्र करते हुए क्षेत्रीय हालात और समुद्री मार्ग पर अमेरिकी नियंत्रण का भी दावा किया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया अकाउंट ‘ट्रुथ सोशल’ पोस्ट में कहा, ”ईरान को यह समझने में बहुत मुश्किल हो रही है कि उसका असली नेता कौन है। उन्हें खुद भी साफ नहीं पता। वहां ‘हार्डलाइनर’ (कड़े रुख वाले) और ‘मॉडरेट’ (नरम रुख वाले) गुटों के बीच भारी अंदरूनी खींचतान चल रही है। हार्डलाइनर युद्ध के मैदान में बुरी तरह से हार रहे हैं, जबकि मॉडरेट (जो वैसे बहुत नरम भी नहीं हैं) अब ज्यादा सम्मान पा रहे हैं। यह सब काफी अराजक और हैरान करने वाला है।”
ट्रंप ने कहा, ”हमारा होर्मुज स्ट्रेट पर पूरी तरह नियंत्रण है। कोई भी जहाज तब तक अंदर या बाहर नहीं जा सकता जब तक उसे अमेरिकी नौसेना की मंजूरी न मिले। इसे पूरी तरह ‘सील’ कर दिया गया है, जब तक कि ईरान कोई समझौता नहीं कर लेता।”
दरअसल, ट्रंप प्रशासन ने ईरान के साथ युद्धविराम को बढ़ा दिया है, जबकि व्यापक नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखी गई है। व्हाइट हाउस ने कहा कि बातचीत के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं है और तेहरान पर आर्थिक दबाव जारी रखने के संकेत दिए हैं।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लीविट ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका दोहरी रणनीति अपना रहा है – सैन्य हमलों को रोकते हुए वित्तीय और समुद्री प्रतिबंधों को और कड़ा किया जा रहा है।

