लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानमंडल का मानसून सत्र 29 जुलाई से शुरू होने वाला है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि कार्यवाही हंगामेदार होने की संभावना है। क्योंकि, 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद यह विधानमंडल का पहला सत्र होगा। जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष, बीजेपी की राज्य इकाई में गड़गड़ाहट के बीच सदन में आमने-सामने होंगे।
राज्य सरकार ने लंबित विधायी कार्य निपटाने के लिए संक्षिप्त मानसून सत्र आयोजित करने का निर्णय लिया है। एक मंत्री ने कहा कि राज्य मंत्रिमंडल ने (संचालन द्वारा) 29 जुलाई से मानसून सत्र आयोजित करने का निर्णय लिया है। हालांकि, बीजेपी नेता सदन में एकजुट मोर्चा बनाने का प्रयास कर सकते हैं, लेकिन बीजेपी में ‘सरकार बनाम संगठन’ दरार के बीच ध्यान उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य पर रहेगा।
आक्रामक विपक्ष, सत्र के दौरान बीजेपी सरकार पर निशाना साधने के लिए इस अवसर का उपयोग कर सकता है। कन्नौज से लोकसभा के लिए चुने जाने के बाद विधायक पद से इस्तीफा दे चुके समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पहले ही इस संबंध में संकेत दे दिए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर विपक्ष के संभावित आक्रामक एजेंडे के लिए आवाज बुलंद कर दी है।
