#VBGRAMG4ViksitBharat : मनरेगा को ‘राम-राम’- आज से देश में लागू हुआ G-RAM G एक्ट, जिससे होगी लाखों ग्रामीण श्रमिकों की आजीविका मजबूत…..

न्यूज़ डेस्क(BNS)। आज से देश भर में मनरेगा की जगह VB G-RAM-G यानी ‘विकसित भारत–रोजगार और आजीविका मिशन गारंटी (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 लागू हो गया है। अब इस योजना के तहत 100 नहीं बल्कि 125 दिन के रोजगार की गारंटी होगी. वहीं इस योजना में न्यूनतम मजदूरी की दर को भी बढ़ाकर 327 रुपये से ज्यादा किया गया है. साथ ही इसमें आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल का भी जिक्र है, जिससे 2047 विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।

1. ये है क्या?1 जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू हो रहा नया ग्रामीण रोजगार कानून। सरकार ने 11 मई 2026 को इसकी अधिसूचना जारी की थी।

इसकी प्रमुख बातें इस प्रकार हैं :

  • सभी 34 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्रों में मजदूरी दरों में वृद्धि हुई है।
  • 21 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और प्रशासनिक इकाइयों को 300 रुपये की नई अंतरिम आधार मजदूरी दर पर लाया गया है।
  • वीबी-जी राम जी के तहत मनरेगा के तहत राष्ट्रीय औसत अधिसूचित वेतन 298.8 रुपये प्रति दिन से बढ़कर 327.4 रुपये प्रति दिन हो गया है, जो प्रति दिन 28.6 रुपये की औसत वृद्धि दर्शाता है।
  • देश भर में औसत प्रतिशत वृद्धि 10 प्रतिशत से अधिक है।
  • वीबी-जी राम जी के तहत ग्रामीण मजदूरी के लिए 300 रुपये नया राष्ट्रीय बेंचमार्क बन गया है।

साल 2004 में डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यह संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार केंद्र में आई थी, तो उसने ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने के मकसद से एक योजना ‘राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी एक्ट’ (नरेगा या NREGA) लागू की थी। सरकार ने इस योजना से दो लक्ष्य साधने का काम किया था- एक तो सामुदायिक विकास (तालाब, कुएं, ग्रामीण सड़के और जल संरक्षण ढांचे) जैसे काम कर संसाधन को उपलब्ध कराना चाहती थी, साथ ही इससे ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले परिवारों के व्यस्क सदस्यों को आजीविका के साधन उपलब्ध कराना था।

NREGA रोजगार एक्ट साल (वित्त वर्ष) में कम से कम 100 दिन की गारंटी देता था. UPA सरकार इसे अपने कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक गिनती थी। 2009 में उसने इसका नाम बदलकर मनरेगा ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी एक्ट'(MGNREGA या मनरेगा) कर दिया।

सरकार का तर्क है कि MGNREGA 2005 में बना था। अब गांवों में डिजिटल, कनेक्टिविटी, आय के स्रोत सब बदल गए। पुरानी कमजोरियां थीं:सिर्फ मजदूरी देना, टिकाऊ काम कम बननाभुगतान में देरीखेती सीजन में मजदूरों की कमीपारदर्शिता और जवाबदेही की कमी।

20 साल बाद अब इस योजना का अस्तित्व खत्म हो गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार अब इस योजना के बदले नई योजना VB G-RAM-G यानी ‘विकसित भारत–रोजगार और आजीविका मिशन गारंटी (ग्रामीण) अधिनियम, 2025’ लेकर आई है. इस योजना को मनरेगा का अपडेशन कहा जा सकता है।

मनरेगा की अपेक्ष इस योजना में अगर कोई सबसे बड़ा बदलाव है तो वह यह है कि इससे फ्रॉड और घपले-घोटाले से बचने की आधुनिक ढंग से कोशिश की गई है। सरकार ने काम की प्रगति और फ्रॉड से बचने की रियल टाइम रिपोर्ट सिस्टम लागू करने के मकसद से बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन, ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) या मोबाइल बेस्ड वर्कसाइट मॉनिटरिंग, प्रोएक्टिव पब्लिक डिस्क्लोजर, ऑडिट और फ्रॉड रिस्क को कम करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल और प्लानिंग जैसी चीजों को शामिल किया है। इससे जवाबदेही और फ्रॉड से बचा जा सकेगा. मनरेगा के नाम पर जो फर्जीवाड़ा होता था, उसे रोका जा सकता है।

इस लिहाज से देखा जाए तो अब मनरेगा में काम करने वाले मजदूर को कुल 10,500 रुपये का लाभ होगा. पहले 100 दिन के काम के न्यूनतम वेतन के आधार पर 29,880 रुपये के करीब मिलते थे। अब 125 दिन काम के बदले उन्हें 40,925 रुपये मिलेंगे. 25 दिन का अतिरिक्त काम बढ़ने से उन्हें सीधे-सीधे 8,125 रुपये का फायदा होगा, जबकि न्यूनतम 100 दिन के काम की तुलना करें तो उन्हें अब 100 दिन काम करने करने पर बढ़ी हुई मजदूरी (28.60 रुपये प्रतिदिन) 2860 रुपये का लाभ होगा।

मनरेगा योजना मांग पर आधारित होती थी, जिसका मतलब था कि अगर काम की मांग होती थी तो तब सरकार को अतिरिक्त फंड देना पड़ता था। अब विकसित भारत- रोजगार और आजीविक मिशन गारंटी (VB-G RAM G) के तहत राज्यों के लिए मानक आवंटन का प्रावधान है। इस तय मानक से ज्यादा होने वाला अतिरिक्त खर्च राज्य सरकारों को भी उठाना होगा।

इससे पहले मनरेगा के तहत दी जाने वाली मजदूरी का 100 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार के जिम्मे आता था, जबकि संबंधित प्रोजेक्ट में लगने वाले मटीरियल की लागत को केंद्र 75 फीसदी और राज्य सरकार 25 फीसदी (75:25) वहन करती थी। अब जी-राम-जी योजना के तहत यह योजना केंद्र प्रायोजित ही होगी लेकिन अब राज्य सरकार को भी खर्च का पहले से ज्यादा हिस्सा वहन करना होगा।

इस योजना के मुताबिक, अब पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में केंद्र और राज्य सरकारों के खर्च का अनुपास 90:10 होगा, जबकि बाकी सभी राज्यों और विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों में यह अनुपात 60:40 होगा। जिन केंद्र शासित प्रदेशों में विधानसभाएं नहीं हैं वह का 100 फीसदी खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी।

अब तक मनरेगा के तहत काम की मांग साल में कभी भी की जा सकती थी, लेकिन VB-G RAM G के तहत अब राज्य सरकार बुवाई और कटाई के मुख्य कृषि मौसमों की अवधि की घोषणा करेगी। इस दौरान इस योजना के तहत काम की मांग नहीं की जा सकती।

लागू कैसे होगा?1 जुलाई 2026 से पूरे देश में30 जून 2026 तक MGNREGA के सारे काम चलते रहेंगेपुराने जॉब कार्ड और चल रहे काम नए सिस्टम में ट्रांसफर हो जाएंगेराज्यों को 6 महीने तैयारी का समय मिलेगा। पर फंडिंग 1 जुलाई से ही नए कानून में शिफ्ट हो जाएगी।

इस लिहाज से देखा जाए तो अब मनरेगा में काम करने वाले मजदूर को कुल 10,500 रुपये का लाभ होगा. पहले 100 दिन के काम के न्यूनतम वेतन के आधार पर 29,880 रुपये के करीब मिलते थे। अब 125 दिन काम के बदले उन्हें 40,925 रुपये मिलेंगे। 25 दिन का अतिरिक्त काम बढ़ने से उन्हें सीधे-सीधे 8,125 रुपये का फायदा होगा, जबकि न्यूनतम 100 दिन के काम की तुलना करें तो उन्हें अब 100 दिन काम करने करने पर बढ़ी हुई मजदूरी (28.60 रुपये प्रतिदिन) 2860 रुपये का लाभ होगा।

मनरेगा योजना मांग पर आधारित होती थी, जिसका मतलब था कि अगर काम की मांग होती थी तो तब सरकार को अतिरिक्त फंड देना पड़ता था। अब विकसित भारत- रोजगार और आजीविक मिशन गारंटी (VB-G RAM G) के तहत राज्यों के लिए मानक आवंटन का प्रावधान है. इस तय मानक से ज्यादा होने वाला अतिरिक्त खर्च राज्य सरकारों को भी उठाना होगा।

अब केंद्र पर नहीं श्रम पर 100 फीसदी भार
इससे पहले मनरेगा के तहत दी जाने वाली मजदूरी का 100 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार के जिम्मे आता था, जबकि संबंधित प्रोजेक्ट में लगने वाले मटीरियल की लागत को केंद्र 75 फीसदी और राज्य सरकार 25 फीसदी (75:25) वहन करती थी। अब जी-राम-जी योजना के तहत यह योजना केंद्र प्रायोजित ही होगी लेकिन अब राज्य सरकार को भी खर्च का पहले से ज्यादा हिस्सा वहन करना होगा।

इस योजना के मुताबिक, अब पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में केंद्र और राज्य सरकारों के खर्च का अनुपास 90:10 होगा, जबकि बाकी सभी राज्यों और विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों में यह अनुपात 60:40 होगा। जिन केंद्र शासित प्रदेशों में विधानसभाएं नहीं हैं वह का 100 फीसदी खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी।

अब तक मनरेगा के तहत काम की मांग साल में कभी भी की जा सकती थी, लेकिन VB-G RAM G के तहत अब राज्य सरकार बुवाई और कटाई के मुख्य कृषि मौसमों की अवधि की घोषणा करेगी। इस दौरान इस योजना के तहत काम की मांग नहीं की जा सकती।

सीधे शब्दों में: नाम बदला, दिन बढ़े 100 से 125, पैसा सीधा खाते में, खेती के टाइम काम बंद, और फोकस अब सिर्फ मजदूरी पर नहीं बल्कि गांव का इंफ्रा बनाने पर।

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