सुप्रीम कोर्ट ने WhatsApp को क्यों लगाई फटकार? – नियम नहीं मानने हैं तो भारत छोड़कर निकल जाओ

नई दिल्ली। लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वॉट्सऐप को सुप्रीम कोर्ट से कड़ी फटकार लगी है। कोर्ट ने डेटा शेयरिंग के बहाने निजता से खिलवाड़ पर मेटा और वॉट्सऐप कंपनी को साफ कहा है कि कोई भी कंपनी इस तरह से देश की जनता के अधिकार से खिलवाड़ नहीं कर सकती। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने वॉट्सऐप को कहा कि अगर भारत के नियम नहीं मानने हैं तो तुम्हें देश छोड़कर निकल जाना चाहिए।

मामला मेटा और वॉट्सऐप ने कॉम्पटीशन कमिशन ऑफ इंडिया के फैसले का था, जिसपर कंपनी पर 213.14 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। कोर्ट ने कहा कि 9 फरवरी को बेंच जुर्माने को लेकर अंतरिम आदेश पारित करेगी।

सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जयमाला बागची, जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि 9 फरवरी को इस मामले में अंतरिम आदेश पारित किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस देश में निजता के अधिकार की सख्ती से रक्षा की जाती है। प्रौद्योगिकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों की गोपनीयता संबंधी शर्तें इतनी चालाकी से तैयार की गई हैं कि आम नागरिक उन्हें समझ ही नहीं पाएंगे और ये कंपनियां उनका डेटा चोरी करती रहेंगी। कोर्ट ने कहा कि वह प्रौद्योगिकी क्षेत्र के दिग्गजों को उन उपभोक्ताओं का डेटा साझा करने की अनुमति नहीं देगा जिनके साथ असान समझौते किए गए हैं।

https://x.com/NewsAlgebraIND/status/2018572402125639857?s=20

सुप्रीम कोर्ट ने व्हाट्सऐप और मेटा की याचिकाओं के मामले में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को पक्षकार बनाया और कहा कि वह नौ फरवरी को अंतरिम आदेश पारित करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि ‘ऑप्ट आउट का विकल्पही कहां है?’ अगर यूजर डेटा शेयर नहीं करना चाहता तो उसे इससे बाहर रहने का विक्लपमिलना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि टेक जॉयन्ट्स को इस तरह से डेटा शेयर करने की परमीशन नहीं मिलेगी। वहीं वॉट्सऐप की तरफ से पेश हुए सीनियर वकील अखिल सिब्बल ने कहा कि प्लैटफॉर्म की पॉलिसी से बाहर रहने का भी ऑप्शन है।

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बता दें कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने साल 2024 नवंबर में एक आदेश जारी किया था। इसमें कहा गया था कि वॉट्सऐप की 2021 में गोपनीयता नीति की जांच की गई। इसमें पाया गया कि यूजर्स पर मानो या तो छोड़ दो की नीति थोपी गई है। रिपोर्ट में बताया गया कि यूजर्स को ऑप्ट आउट करने का भी विकल्प नहीं दिया गया है। आयोग ने कहा था कि यह प्रतिस्पर्धा नियम 2002 के खिलाफ है। इसी आधार पर कंपनी पर 213.14 करोड़ का जुर्माना लगाया गया था। सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई चल रही थी।

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