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ढोकरा कला देखकर अभिभूत हुए जनमानस, लकड़ी और धातु में जीवंत हो रही बस्तर की संस्कृति

रायपुर। छत्तीसगढ़ की पहचान केवल यहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य, लोकगीत और लोकनृत्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की पारंपरिक हस्तकलाएं भी प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करती हैं। ऐसी ही एक अनूठी विरासत है बस्तर की ढोकरा कला, जिसमें कलाकार अपने हुनर और रचनात्मकता से लकड़ी और धातु को आकर्षक कलाकृतियों का रूप देते हैं। राज्योत्सव में कोण्डागांव जिले के ग्राम करणपुर से पहुंचे कलाकारों द्वारा तैयार की गई ये कलाकृतियां लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

बस्तर की पारंपरिक गढ़वा कला से जुड़े ये कलाकार पीढ़ियों से चली आ रही शिल्पकला को अपने हाथों से जीवंत कर रहे हैं। इनके स्टॉल पर आदिवासी जनजीवन, पारंपरिक रीति-रिवाज, देवी-देवताओं और लोकआस्था से जुड़ी अनेक कलाकृतियां देखने को मिल रही हैं। खास बात यह है कि इन क

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