मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव खारिज, दोनों सदनों के स्पीकर ने ठुकराया प्रस्ताव….

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव खारिज हो गया है। राज्यसभा के स्पीकर ने प्रस्ताव ठुकरा दिया है। बता दें कि यह पहली बार था जब मौजूदा चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर कुल 193 सांसदों ने साइन किया था। इसमें लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63 सांसदों ने साइन किया था।वहीं, लोक सभा अध्यक्ष ने सीईसी के रूप में ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए विपक्ष द्वारा प्रस्ताव लाने के लिए अलग नोटिस को भी खारिज कर दिया। राज्यसभा के महासचिव पीसी मोदी द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि उच्च सदन के सभापति सीपी राधाकृष्ण ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ विपक्षी सदस्यों द्वारा दिए गए नोटिस को अस्वीकार कर दिया है।

12 मार्च 2026 को राज्यसभा में 63 सांसदों के हस्ताक्षर से महाभियोग का नोटिस दिया गया था। लोकसभा में भी 130 सांसदों ने समर्थन किया। नियम के मुताबिक, न्यूनतम 50 राज्यसभा या 100 लोकसभा सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं। संख्या पूरी थी, लेकिन सभापति ने इसे स्वीकार नहीं किया।

10 पेज की नोटिस में मुख्य चुनाव पर कार्यपालिका के प्रति आज्ञाकारी होने और संवैधानिक पद और शक्तियों के जानबूझकर और इरादतन दुरुपयोग जैसे आरोप लगाए गए थे। बता दें कि विपक्ष एसआईआर को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त का विरोध कर रहा है। विपक्ष का आरोप है कि एसआईआर का उद्देश्य, उसके समर्थकों को वोट देने के अधिकार से वंचित करना है।

लोकसभा सचिवालय ने क्या कहा
लोकसभा सचिवालय ने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 324(5), मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यालय की अवधि) अधिनियम, 2023 की धारा 11(2) और न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत लोकसभा के 130 सदस्यों द्वारा हस्ताक्षरित 12 मार्च, 2026 के एक प्रस्ताव संबंधी नोटिस लोकसभा अध्यक्ष को सौंपा गया था जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की गई थी

राज्यसभा के सभापति ने पूरे मामले पर विस्तृत चर्चा के बाद प्रस्ताव खारिज कर दिया। कानूनी प्रावधानों-मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम 2023 की धारा 11(2) और न्यायाधीश (जांच) अधिनियम 1968-के मुताबिक प्रस्ताव में पर्याप्त आधार नहीं पाए गए। विपक्ष के आरोप राजनीतिक लगे, जबकि महाभियोग केवल गंभीर और साबित कदाचार पर ही चलता है।

फोटो स्रोत :X

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