मयुरडोंगर की महिलाऐं कर रही शाक-सब्जियों की खेती
कोण्डागांव। विकासखण्ड कोण्डागांव अंतर्गत ग्राम मयुरडोंगर एवं चारगांव में विगत एक वर्ष से किए गए कृषि सहित उद्यानिकी, क्रेडा, पशुधन, मात्स्यिकी विभागों के योजनाओं के ठोस क्रियान्वयन का सुखद परिणाम एवं प्रभाव इन गांव में दिखने लगा है। मत्स्य पालन, कुक्कुट पालन, शाक-सब्जियों की हरियाली ने वाकई ग्राम के नक्शे के बदल के रख दिया है।
ज्ञात हो कि विकासखण्ड कोण्डागांव के इस जनजातीय दुर्गम गांव मयुरडोंगर (जनसंख्या 327) में वृहत्तर कार्ययोजना का औपचारिक शुभारंभ हुए एक वर्ष हो चुका है। इस अवधि में कृषि विभाग के द्वारा गांव के 28 परिवारो के 115 एकड़ खेतों में बोरवेल की खुदाई की गई है साथ ही इस सम्पूर्ण भूमि का फेंसिग कार्य भी पूर्ण किए गए और मनरेगा के तहत इसी भूमि में तालाब निर्माण और भूमि मरम्मत के कार्यो को भी अंजाम दिया गया। इसके अलावा सौर सुजला योजना के तहत लाभार्थियों के खेतों में सौर पम्प भी लगाये गए है। जो किसानो के सिंचाई गतिविधि के लिए फायदेमंद साबित हुए। इस क्रम जिला कलेक्टर नीलकंठ टीकाम द्वारा दिनांक 22 फरवरी को ग्राम मयूरडोंगर में चल रहे मेगा प्रोजेक्ट का अलसुबह जायजा लिया गया। इस दौरान उन्होंने योजना के तहत खोदे गए तालाबो और खेतो में लगाई गई शाक-सब्जियों एवं कुक्कुट पालन केन्द्र को देखा। इस मौके पर उन्होंने ग्राम की स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा प्रारंभ किए गए ‘तिखुर’ प्रसंस्करण केन्द्र का अवलोकन करके महिलाओं को प्रोत्साहित किया।
कलेक्टर ने इस अवसर पर अपने प्रेरक उदबोधन में कहा कि ग्रामीण अपने गांव को इस प्रकार विकसित करे कि यह गांव अपने आसपास के गांव के लिए अनुकरणीय उदाहरण बने और इस गांव में किये जा रहे प्रयासो को अन्य ग्रामों में दोहराया जा सके। उन्होने मयुरडोंगर में वृहत ग्रामीण विकास योजना पर पुन: प्रकाश डालते हुए कहा कि कृषि के अलावा, शिक्षा, स्वास्थ्य,एंव अधोसरंचना ढ़ांचे को इस प्रकार सुदृढ़ किया जायेगा जिससे ग्रामीणो में स्थायी सकारात्मक परिवर्तन परिलक्षित होगा और इस टिकाउ विकास के बदौलत स्थानीय ग्रामवासी अपने सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुखद बदलाव ला सकेंगे।
