जिन आरोपियों की संपत्ति कुर्क होनी थी, उनका नाम ही चार्जशीट से हटा
बिलासपुर। राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए ने ऐसे दो आरोपियों का नाम ही चार्जशीट से हटा दिया, जिनको पहले आरोपी मानकर फरार घोषित किया गया। इनके खिलाफ सम्पत्ति कुर्क करने का आदेश भी हो चुका था। जब तत्कालीन प्रदेश सरकार ने कांग्रेस और पीडि़तों की मांग पर इस घटना की सीबीआई जांच की मांग की तो केन्द्र ने इससे इन्कार कर दिया। इसकी वजह यह बताई गई कि एएनआई ने जांच पूरी कर ली है। इस महत्वपूर्ण जानकारी को तत्कालीन सरकार ने सार्वजनिक नहीं किया।
उक्त आरोप झीरम मामले की कांग्रेस की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने लगाया। उन्होंने कहा कि झीरम घाटी जांच में कुल 39 लोगों को एएनआई ने आरोपी बनाया था। इनमें से कई लोग फरार थे। इनमें करीम नगर आंध्रप्रदेश के मुपाला लक्ष्मण उर्फ गणपति उर्फ श्रीवानिवास तथा वेलमपल्ली, नार्थ तेलंगाना के तिरुपति उर्फ देवजी उर्फ बीरेन्द्र का नाम भी शामिल था। इन दोनों की गिरफ्तारी न होने पर इन्हें फरार घोषित कर आंध्रप्रदेश के अखबारों में एएनआई ने इश्तहार भी छपवाया, लेकिन बाद में एनआईए की चार्जशीट से इन दोनों के नाम गायब थे।
श्रीवास्तव ने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने मृतकों के परिजन और कांग्रेस की लगातार मांग के बाद विधानसभा में इस मामले की सीबीआई जांच की घोषणा की थी। 29 मार्च 2016 को केन्द्र को पत्र लिखकर इसकी मांग राज्य सरकार ने केन्द्र से की। कई माह बाद 13 दिसम्बर 2016 को केन्द्रीय कार्मिक मंत्रालय ने एक पत्र लिखकर बताया कि चूंकि इस मामले की एनआईए जांच पूरी हो चुकी है अतएव सीबीआई जांच की अनुमति नहीं दी जा रही है। इस मामले में एनआईए और सीबीआई दोनों से सलाह भी ली गई है। श्रीवास्तव ने कहा कि केन्द्र से मिले इस पत्र की जानकारी तत्कालीन सरकार ने सार्वजनिक नहीं की।
00 कांग्रेस के अधिवक्ता का झीरम मामले में आरोप
