लोकसभा में बोले प्रधानमंत्री मोदी – ‘आजादी की लड़ाई में वंदे मातरम एक चेतना का मंत्र’ था, बोले- कांग्रेस ने कर दिए वंदेमातरम् के टुकड़े, गिनाए नेहरू कारनामे..

नई दिल्ली। लोकसभा में वंदे मातरम पर 10 घंटे की चर्चा सोमवार को शुरू हो गई है। इस गीत के 150 साल पूरे होने के मौके पर यह चर्चा हो रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में कहा कि ‘वंदे मातरम सिर्फ राजनैतिक आजादी की लड़ाई का मंत्र नहीं था। यह भारतीयों के लिए आजादी की प्रेरणा और मातृभूमि को मुक्त कराने का संकल्प मंत्र था। पीएम मोदी ने इस दौरान कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि जब भारत विचार के 100 साल हुए, तो आपातकाल में नागरिक अधिकारों का गला घोंटा गया था।

संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है। सोमवार को संसद का आठवां दिन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ पर चर्चा की शुरुआत की। देश की आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले इस बोल के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में संसद में खास चर्चा की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में बोलते हुए वंदे मातरम् पर हो रही चर्चा को गौरव का पल बताया।

उन्होंने कहा, “हमने इस महत्वपूर्ण अवसर पर एक सामूहिक चर्चा का रास्ता सुना है। जिस मंत्र और जयघोष ने देश की आजादी के आंदोलन को ऊर्जा और प्रेरणा दी थी और त्याग और तपस्या का मार्ग दिखाया था। उस वंदे मातरम् को स्मरण करना हम लोगों का सौभाग्य है। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि हम इस पल के साक्षी बन रहे हैं।” उन्होंने कहा, “एक ऐसा कालखंड जो हमारे सामने इतिहास की अनगिनत घटनाओं को अपने सामने लेकर आता है। यह चर्चा सदन की प्रतिबद्धता को तो प्रकट करेगी ही, लेकिन आने वाली पीढ़ियों के लिए भी यह शिक्षा का कारण बन सकती है अगर हम इसका सदुपयोग करेंगे। आज हम वंदे मातरम की 150 वर्ष की सामूहिक ऊर्जा को अनुभूति कर रहे हैं।”

पीएम मोदी ने वंदे मातरम् के 150 वर्षों की यात्रा को याद करते हुए कहा, “यह यात्रा अनेक पड़ावों से गुजरी है, लेकिन वंदे मातरम् 50 वर्ष पूरे हुए तो देश गुलामी में जीने के लिए मजबूत था। जब 100 साल पूरे हुए तो देश आपातकाल की जंजीरों में जकड़ा हुआ था। भारत के संविधान का गला घोंट दिया गया था। देशभक्ति के लिए जीने-मरने वाले लोगों को जेल में बंद कर दिया गया था। दुर्भाग्य से एक काला कालखंड हमारे इतिहास में उजागर हो गया।”

उन्होंने कहा, “150 वर्ष उस महान अध्याय और गौरव को दोबारा स्थापित करने का अवसर है। मैं मानता हूं कि सदन और देश को इस अवसर को जाने नहीं देना चाहिए। यही वंदे मातरम है, जिसने 1947 में देश को आजादी दिलाई।”

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