मन की बात: आज युवा पीढ़ी में बड़ा बदलाव नजर आ रहा है, आज का युवा बने बनाए रास्तों पर चलना नहीं चाहता, वो नए रास्ते बनाना चाहता है- पीएम मोदी

न्यूज़ डेस्क। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात के जरिए राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि आज का युवा मन बने बनाए रास्तों पर चलना नहीं चाहता है। वो नए रास्ते बनाना चाहता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘आज युवा का मन बदल चुका है और आज का युवा मन घिसे-पिटे पुराने तौर तरीकों से कुछ नया करना चाहता है, हटकर के करना चाहता है। आज का युवा मन बने बनाए रास्तों पर चलना नहीं चाहता है। वो नए रास्ते बनाना चाहता है। अननॉन जगह पर कदम रखना चाहता है। मंजिल भी नयी, लक्ष्य भी नए, राह भी नयी और चाह भी नयी, अरे एक बार मन में ठान लेता हैं न युवा, जी-जान से जुट जाता है। दिन-रात मेहनत कर रहा है। हम देखते हैं, अभी कुछ समय पहले ही, भारत ने, अपने स्पेस सेक्टर को ओपन किया और देखते ही देखते युवा पीढ़ी ने उस मौके को पकड़ लिया और इसका लाभ उठाने के लिए कॉलेजों के छात्र, यूनिवर्सिटी, प्राउवेट सेक्टर में काम करने वाले नौजवान बढ़-चढ़ करके आगे आए हैं और मुझे पक्का भरोसा है आने वाले दिनों में बहुत बड़ी संख्या ऐसे उपग्रह की होगी, जो हमारे युवाओं ने, हमारे छात्रों ने, हमारे कॉलेज ने, हमारी यूनिवर्सिटीज ने, लैब में काम करने वाले स्टूडेंट्स ने काम किया होगा।’

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘आज जहां भी देखो, किसी भी परिवार में जाओ, कितना ही संपन्न परिवार हो, पढ़े-लिखे परिवार हो, लेकिन अगर परिवार में नौजवान से बात करो तो वो क्या कहता है वो अपने पारिवारिक जो परम्पराओं से हटकर के कहता है मैं तो स्टार्ट अप करूंगा, स्टार्ट अप में चला जाऊंगा। यानी रिस्क लेने के लिए उसका मन उछल रहा है। आज छोटे-छोटे शहरों में भी स्टार्ट अप कल्चर का विस्तार हो रहा है और मैं उसमें उज्जवल भविष्य के संकेत देख रहा हूं। अभी कुछ दिन पहले ही हमारे देश में खिलौनों की चर्चा हो रही थी। देखते ही देखते जब हमारे युवाओं के ध्यान में ये विषय आया उन्होंने भी मन में ठान लिया कि दुनिया में भारत के खिलौनों की पहचान कैसे बने। और नए-नए प्रयोग कर रहे हैं और दुनिया में खिलौनों का बहुत बड़ा मार्केट है, 6-7 लाख करोड़ का मार्केट है। आज भारत का हिस्सा बहुत कम है। लेकिन खिलौने कैसे बनाना, खिलौने की विविधता क्या हो, खिलौनों में टेक्नोलॉजी क्या हो। आज हमारे देश का युवा उसकी ओर ध्यान केन्द्रित कर रहा है, कुछ कंट्रीब्यूट करना चाहता है। मेरे देश का युवा मन अब सर्वश्रेष्ठ की तरफ अपने आपको केन्द्रित कर रहा है। सर्वोत्तम करना चाहता है, सर्वोत्तम तरीके से करना चाहता है। ये भी राष्ट्र की बहुत बड़ी शक्ति बनकर उभरेगा।’

मन की बात कार्यक्रम में मेजर ध्यानचंद को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उनका जीवन खेल को समर्पित था। देश को कितने ही पदक क्यों न मिल जाएं, लेकिन जब तक हाकी में पदक नहीं मिलता भारत का कोई भी नागरिक विजय का आनंद नहीं ले सकता है और इस बार ओलंपिक में चार दशक के बाद पदक मिला। उन्होंने कहा, ‘हम सबको पता है आज मेजर ध्यानचंद जी की जन्म जयंती है। और हमारा देश उनकी स्मृति में इसे राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाता भी है। मैं सोच रहा था कि शायद, इस समय मेजर ध्यानचंद जी की आत्मा जहां भी होगी, बहुत ही प्रसन्नता का अनुभव करती होगी। क्योंकि दुनिया में भारत की हॉकी का डंका बजाने का काम ध्यानचंद जी की हॉकी ने किया था। और चार दशक बाद, क़रीब-क़रीब 41 साल के बाद, भारत के नौजवानों ने, बेटे और बेटियों ने हॉकी के अन्दर फिर से एक बार जान भर दी। और कितने ही पदक क्यों न मिल जाएं, लेकिन जब तक हॉकी में पदक नहीं मिलता भारत का कोई भी नागरिक विजय का आनंद नहीं ले सकता है और इस बार ओलंपिक में हॉकी का पदक मिला, चार दशक के बाद मिला। आप कल्पना कर सकते हैं मेजर ध्यानचंद जी के दिल पर, उनकी आत्मा पर, वो जहां होंगे, वहां, कितनी प्रसन्नता होती होगी और ध्यानचंद जी का पूरा जीवन खेल को समर्पित था और इसलिए आज, जब हमें देश के नौजवानों में हमारे बेटे-बेटियों में, खेल के प्रति जो आकर्षण नजर आ रहा है। माता-पिता को भी बच्चे अगर खेल में आगे जा रहे हैं तो खुशी हो रही है, ये जो ललक दिख रही है न मैं समझता हूं, यही मेजर ध्यानचंद जी को बहुत बड़ी श्रद्धांजलि है।’

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